बिहार में डिजिटल सर्वे की शुरुआत, 33 सवालों से जुटेगी आबादी की जानकारी !
बिहार में डिजिटल सर्वे की शुरुआत, 33 सवालों से जुटेगी आबादी की जानकारी !
बिहार में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और नागरिक मोबाइल ऐप से खुद डेटा भर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी।
बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने ‘भारत की जनगणना 2027’ को लेकर कहा कि अब कागजी प्रक्रिया पुरानी हो जाएगी, क्योंकि अगली जनगणना पूरी तरह ‘सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CMMS) और मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित होगी। पटना में आयोजित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए सटीक और भरोसेमंद डेटा बेहद जरूरी है। खास बात यह है कि इस बार लोगों को ‘स्व-गणना’ (Self Counting) का विकल्प भी मिलेगा, जिससे वे घर बैठे सुरक्षित तरीके से अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।
जनगणना के दौरान नागरिकों से 33 तरह के सवाल पूछे जाएंगे। इनमें मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों का विवरण, बुनियादी सुविधाएं, घरेलू उपकरण और जीवन स्तर से जुड़े पहलू शामिल होंगे। स्टेट कोऑर्डिनेटर सीके अनिल ने बताया कि 17 अप्रैल से 1 मई तक लोग मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए स्व-घोषणा के आधार पर जानकारी दर्ज कर सकेंगे। एक परिवार के अलग-अलग मकानों का विवरण भी इसमें जोड़ा जा सकेगा। इसके बाद 2 मई से 31 मई तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे।
इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की सरकारी योजनाएं और विकास नीतियां तय होती हैं, इसलिए सही जानकारी देना बेहद अहम माना गया है। जनगणना का दूसरा चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा, जिसमें कर्मी घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की अंतिम सूची तैयार करेंगे और कुल आबादी का डेटा एकत्र करेंगे।
यह अभियान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और जनगणना निदेशालय के निदेशक एम. रामचंद्रुडू की देखरेख में चल रहा है। हाई-टेक ऐप के उपयोग से डेटा संग्रह की रफ्तार बढ़ेगी और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी।
मुख्य सचिव ने जोर देकर कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नीतियों की बुनियाद है। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना लागू होने से समय की बचत होगी और योजनाओं की सटीकता बढ़ेगी, जिससे बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था आधुनिक दिशा में आगे बढ़ेगी।