भारत में जियो-फेंसिंग तकनीक से होगी जनगणना, सीमा पार करते ही मिलेगा अलर्ट
भारत में जियो-फेंसिंग तकनीक से होगी जनगणना, सीमा पार करते ही मिलेगा अलर्ट
बिहार में होने वाली आगामी जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराई जाएगी, जिसमें आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। जियो-फेंसिंग सिस्टम के माध्यम से प्रत्येक जनगणनाकर्मी का कार्यक्षेत्र तय कर दिया जाएगा, ताकि वे उसी निर्धारित इलाके में काम करें। इससे डेटा संग्रह के दौरान गलती, दोहराव या गड़बड़ी की संभावना कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक सटीक व पारदर्शी बन सकेगी।
बिहार में होने वाली आगामी जनगणना को इस बार पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है। 18 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत जियो-फेंसिंग तकनीक होगी, जिसके जरिए हर जनगणनाकर्मी के कार्यक्षेत्र की डिजिटल सीमा तय कर दी जाएगी। यदि कोई कर्मी अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर जानकारी दर्ज करने की कोशिश करेगा, तो उसके टैबलेट पर तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इस पूरी हाई-टेक व्यवस्था की निगरानी 82 आईएएस अधिकारी करेंगे, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक बनी रहे।
जनगणना कार्य में हर कर्मी के टैबलेट को विशेष कोड और लोकेशन से जोड़ा जाएगा, जो अक्षांश-देशांतर आधारित डिजिटल मैपिंग पर काम करेगा। इससे डेटा संग्रह में गलती या दोहराव की संभावना कम होगी और काम व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा। सरकारी योजना के अनुसार 18 अप्रैल से स्वगणना शुरू होगी, जबकि 31 मई से मकान गणना का चरण शुरू किया जाएगा। जनगणनाकर्मी टैबलेट के जरिए घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे, जिससे रिपोर्ट तैयार करने में समय भी कम लगेगा।
प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए जिला स्तर पर अलग जनगणना विंग बनाए जाएंगे और मल्टी टास्किंग स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए 23 फरवरी को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां वरिष्ठ अधिकारी आगे मास्टर ट्रेनर बनकर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
इस बार सरकार ने बस्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया है। सभी नगर निकायों को अपने क्षेत्रों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जनगणना के दौरान कोई तकनीकी बाधा न आए। सामान्य प्रशासन, राजस्व एवं भूमि सुधार, शिक्षा, पंचायती राज और नगर विकास सहित कई विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से जनगणना को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाए, जिससे विकास योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।