2031 तक बिहार में 1000 किमी नई रेललाइन, बदलेगा यात्रा का अंदाज !
2031 तक बिहार में 1000 किमी नई रेललाइन, बदलेगा यात्रा का अंदाज !
भारतीय रेलवे ने बिहार में बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी की है। 2031 तक करीब 1000 किमी नई रेललाइन बिछाने और कई अहम रूटों के दोहरीकरण का लक्ष्य रखा गया है। 2026-27 के बजट में 10,379 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे परिवहन और व्यापार को मजबूती मिलेगी।
2031 तक बदलेगा बिहार का रेल नेटवर्क, 1000 किमी नई लाइन का लक्ष्य
बिहार के रेल नेटवर्क में अगले पांच सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार ने 2031 तक राज्य में लगभग 1000 किलोमीटर नई रेललाइन बिछाने का टारगेट तय किया है।
इस योजना के तहत 30 बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम होगा, जिनमें 10 नई रेललाइनें और 20 महत्वपूर्ण रेलखंडों का दोहरीकरण शामिल है। रेलवे बोर्ड ने सर्वे के लिए बजट जारी कर दिया है और अगले वित्तीय वर्ष से डीपीआर तैयार होने के बाद काम तेजी से जमीन पर उतरेगा।
पटना-झाझा सेक्शन पर बड़ा काम
डीडीयू–पटना–झाझा रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव काफी ज्यादा रहता है। इसे कम करने के लिए यहां तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी। इससे एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को अलग ट्रैक मिलेंगे और लेटलतीफी कम होगी।
फुलवारी–पाटलिपुत्र जंक्शन के बीच डबलिंग भी प्राथमिकता में है, जिससे पटना आने-जाने वाली ट्रेनों को आउटर पर लंबे इंतजार से राहत मिलेगी।
नए क्षेत्रों को मिलेगा रेल कनेक्शन
औरंगाबाद–बिहटा रेललाइन को अब गति दी जाएगी। इसके अलावा ललितग्राम–वीरपुर और सकरी–फारबिसगंज जैसे सीमावर्ती इलाकों में नई लाइन और दोहरीकरण का काम होगा।
फतुहा–बिदुपुर के बीच गंगा पर नए रेल पुल का निर्माण उत्तर और दक्षिण बिहार के व्यापार को मजबूत करेगा। समस्तीपुर–हसनपुर और खगड़िया लाइन का दोहरीकरण भी योजना में शामिल है।
रफ्तार और माल ढुलाई में बढ़ोतरी
आरा–सासाराम लाइन को फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ने के बाद माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी। किऊल–गया और बरौनी–कटिहार जैसे व्यस्त रूटों पर काम पूरा होने के बाद ट्रेनों की औसत गति में लगभग 30% तक वृद्धि संभव है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 2031 तक बिहार का रेल नेटवर्क आधुनिक और हाई-टेक स्वरूप में बदल जाएगा, जिससे यात्रियों और व्यापार दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा।