समाजवाद के वरिष्ठ नेता सूर्य नारायण सिंह ‘सूरज’ का निधन, जेपी आंदोलन के रहे योद्धा

संघर्ष और सिद्धांतों के प्रतीक ‘सूरज’ नहीं रहे जेपी और लोहिया की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले सूर्य नारायण सिंह ‘सूरज’ का बुधवार को कटिहार के समेली स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वे उन विरले नेताओं में थे जिन्होंने सत्ता की राजनीति से ज्यादा सिद्धांतों और संघर्ष को महत्व दिया।

समाजवाद के वरिष्ठ नेता सूर्य नारायण सिंह ‘सूरज’ का निधन, जेपी आंदोलन के रहे योद्धा
संघर्षशील समाजवादी नेता का निधन 1974 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरा और जेपी-लोहिया विचारधारा के प्रतिबद्ध समर्थक सूर्य नारायण सिंह ‘सूरज’ का बुधवार को कटिहार के समेली स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उन्होंने हमेशा सिद्धांतों और जनसंघर्ष को चुनावी राजनीति से ऊपर रखा। गुरुवार को गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। आपातकाल में लोकतंत्र के प्रहरी सूर्य नारायण सिंह ‘सूरज’ का आवास आपातकाल के समय लोकतंत्र सेनानियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ था। मीसा (MISA) के कठोर दौर में जब आंदोलनकारियों पर दमन तेज था, तब उन्होंने भागलपुर और पूर्णिया के कई कार्यकर्ताओं को अपने घर में आश्रय दिया। उस समय दिखाया गया उनका साहस और संवेदनशीलता आज भी समाजवादी साथियों के बीच मिसाल के तौर पर याद किया जाता है। सिद्धांतों के लिए त्याग की मिसाल समृद्ध जमींदार परिवार से होने के बावजूद सूरज जी ने कभी सत्ता या पद की लालसा नहीं रखी। जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी प्रबल थी कि उन्होंने चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी। कई बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन सफलता न मिलने पर भी उन्होंने अपने समाजवादी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। दिग्गज समाजवादी नेताओं के करीबी उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर, जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे बड़े नेताओं के मार्गदर्शन में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव ने स्मरण करते हुए बताया कि आंदोलन के साथी उन्हें स्नेह से “मामा” कहकर पुकारते थे। उनका जीवन साहस, सादगी और समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। शोक में डूबा राजनीतिक जगत उनके निधन की खबर से बिहार की राजनीतिक दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। विधायक बुलो मंडल, पूर्व सांसद नरेश यादव, कांग्रेस नेता श्रीकांत मंडल और भाजपा के कुमोद कुमार मंडल सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने इसे समाजवादी धारा के लिए अपूरणीय क्षति बताया।