पटना मरीन ड्राइव की बदलेगी तस्वीर, फैब्रिकेटेड दुकानों को हटाने का नीतीश सरकार का प्लान

Patna News: जेपी गंगा पथ पर प्रस्तावित फैब्रिकेटेड दुकानों की योजना में अहम संशोधन किया गया है। मुख्यमंत्री आवास से मिले निर्देशों के बाद दुकानों के डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है, जिसके चलते अब इन्हें गंगा पथ के बजाय किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया है।

पटना मरीन ड्राइव की बदलेगी तस्वीर, फैब्रिकेटेड दुकानों को हटाने का नीतीश सरकार का प्लान
पटना के जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) पर प्रस्तावित फैब्रिकेटेड दुकानों की योजना में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले खरमास के बाद इन दुकानों का आवंटन होना था, लेकिन उससे पहले ही इन्हें हटाने का निर्णय ले लिया गया। सीएम हाउस से दुकानों के मौजूदा डिजाइन में बदलाव के निर्देश दिए गए हैं। अब पटना स्मार्ट सिटी की बोर्ड बैठक में नए डिजाइन पर अंतिम मुहर लगेगी। इस बैठक में पटना की मेयर, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, चेयरमैन समेत सभी बोर्ड सदस्य मौजूद रहेंगे और नए प्रस्ताव को मंजूरी देंगे। नई योजना के तहत गंगा पथ पर लगाई गई सभी फैब्रिकेटेड दुकानों को हटाकर गर्दनीबाग में स्थानांतरित किया जा रहा है। पहले यहां करीब 500 दुकानों के निर्माण की योजना थी, लेकिन डिजाइन में बदलाव के बाद दुकानों की संख्या घट या बढ़ सकती है।जयपुर-इंदौर मॉडल पर तैयार होगा नया खाका अचानक हुए निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूदा डिजाइन को उपयुक्त नहीं माना और उसे अस्वीकार कर दिया. जांच में पाया गया कि स्टॉल के डिजाइन में कई तकनीकी और व्यावहारिक खामियां हैं, जिससे न तो दुकानदारों को सुविधा मिल पा रही थी और न ही ग्राहकों को. इन्हीं कारणों से अब डिजाइन में बदलाव का निर्णय लिया गया है. आगे चलकर जयपुर और इंदौर जैसे शहरों की तर्ज पर ज्यादा आधुनिक, सुविधाजनक और आकर्षक स्टॉल डिजाइन किए जाएंगे. जीविका दीदियों की दिलचस्पी पहले से तैयार फैब्रिकेटेड दुकानों को लेने के लिए जीविका दीदियों ने औपचारिक रूप से पत्र देकर रुचि दिखाई है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये दुकानें जीविका को सौंपी जाएंगी, किसी अन्य विभाग को दी जाएंगी या फिर पटना स्मार्ट सिटी खुद इन्हें संचालित कर राजस्व अर्जित करेगी. इस संबंध में अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा. 280 वेंडरों को मिलनी थी प्राथमिकता दीघा गोलंबर क्षेत्र में लंबे समय से स्टॉल लगाकर आजीविका चला रहे 280 वेंडरों की पहचान पहले ही कर ली गई थी. योजना के अनुसार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर दुकानें आवंटित की जानी थीं. इसके बाद शेष दुकानों के आवंटन के लिए अलग प्रक्रिया तय की जानी थी. 15 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तावित खर्च इन दुकानों को तीन अलग-अलग साइज में डिजाइन किया गया था. प्रत्येक दुकान में बेसिन, स्लैब, एग्जॉस्ट फैन, लाइटिंग और बिजली की पूरी सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 15.45 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित थी. अब सभी की निगाहें पटना स्मार्ट सिटी की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि गंगा पथ की दुकानों का भविष्य और उनका नया स्वरूप कैसा होगा.