फाइनेंस कंपनियों की मनमानी पर नहीं लग रही रोक, आरा–पटना में बीच रास्ते से वसूली एजेंट उठा ले रहे गाड़ी...

फाइनेंस कंपनियों की मनमानी पर नहीं लग रही रोक, आरा–पटना में बीच रास्ते से वसूली एजेंट उठा ले रहे गाड़ी...

पटना : बैंक और प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों की मनमानी पर नहीं लग रही रोक। वसूली एजेंट बीच रास्ते से किडनैपरों के जैसे लोगो की गाड़ियों को उठा ले रहे है। बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी करने का लाइसेंस जैसे इन लोगो को मिल गया हो। ये लोग गाड़ी मालिक को डरा धमका के हजारों रुपयों की वसूली करते है। ये काम आरा से लेकर पटना तक अनेकों जगह किया जा रहा है। प्रशासन भी सिर्फ इस खेल को अपने खुले आंखो से देख रही है, कारवाई के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं करती है।

अगर आपकी गाड़ी की एक या दो किस्त नहीं जमा है तो आपकी गाड़ी को इनके द्वारा जबरदस्ती पकड़ा जाता है। गाड़ी में फैमिली के साथ हो या अकेले हो बाइक से हो या कार से हो गाड़ी को जबरदस्ती रोक दी जाएगी। ज्यादा सवाल जवाब करने पर वसूली एजेंटो के द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया जायेगा। गाड़ी पकड़े जाने के बाद अगर आप अपना गाड़ी का किस्त जमा कर देते है तो उसके बाद भी आप से जबरदस्ती पांच से दस हजार की अवैध वसूली की जाती है।

आपको बता दे की 19 मई को जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की सिंगल बेंच ने धनंजय सेठ बनाम भारत सरकार व अन्य और संलग्न याचिकाओं के खिलाफ सुनवाई करते हुए अपना आदेश जारी किया। सीनियर एडवोकेट के अनुसार बैंक या कोई भी फाइनेंस कंपनी किसी भी हालत में गाड़ियों को रिकवरी टीम या गुंडों के द्वारा जबरदस्ती या बल प्रयोग नहीं कर सकती। उन्हें कानूनन SURFACIA ACT के तहत काम करना होगा। 

कुल 53 पन्नों के आदेश में बड़ी बात यह भी है कि गाड़ी जब्त की अवधि में फाइनेंस कंपनियां किसी तरका सूद, ब्याज नहीं ले सकती है और न ही कोविड-19 के दरम्यान जारी आदेशों के खिलाफ जा सकती है। अपने आदेश में पटना हाईकोर्ट ने साफ स्पष्ट किया है कि जबरन गाड़ी पकड़ने पर गाड़ी के मालिक पुलिस केस भी कर सकते हैं। इस आदेश की कॉपी को बिहार सरकार के साथ ही DGP के साथ जिलों में सभी SSP और SP को भेजने का आदेश दिया गया है।

वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि सभी प्राइवेट और सरकारी बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे लोन वसूली के लिए कोई भी कठोर कदम न उठाएं। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने शिकायतें सुनी हैं कि कुछ बैंकों ने लोन के भुगतान के लिए कितनी बेरहमी बरती हैं। सदन में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि कर्ज के भुगतान के लिए कठोर कदम नहीं उठाए जाने चाहिए। बैंकों को इस मामले को मानवता और संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए।

ईएमआई नहीं चुकाने पर क्या करता है बैंक...

अगर आप कार लोन की ईएमआई नहीं चुकाते हैं तो ऐसे में बैंक पैसे वसूलने के सभी हथकंडे अपनाता है और कई मामलों में आपकी गाड़ी को भी अपने कब्जे में ले लेता है। अगर एक बार आपकी ईएमआई बाउंस होती है तो बैंक आपको रिमाइंडर कॉल्स भेजता है और पेनल्टी के साथ भुगतान का ऑप्शन देता है। वहीं दूसरी बार लगातार ईएमआई नहीं चुकाने पर बैंक से आपके पास ईएमआई चुकाने के लिए लैटर आता है और साथ ही बैंक से कॉल्स व प्रतिनिधि भी आपके घर आकर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही लोन डॉक्यूमेंट में आपकी ओर से बताए गए गारंटरों से भी संपर्क किया जा सकता है।

ऐसा करने पर बैंक अपने कब्जे में लेगा गाड़ी...

अगर आप लगातार कार लोन की तीन ईएमआई नहीं चुकाते हैं और बैंक को इसकी वजह नहीं बताते हैं तो बैंक आपके खिलाफ सख़्त कदम उठा सकता है। ऐसे में बैंक आपके केस को नॉन परफॉर्मिंग असेट (NPA) में काउंट करता है। साथ ही बैंक कार रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर देता है। इस दौरान बैंक रिकवरी एजेंट्स आपके घर आते हैं और कागजी कार्रवाई के बाद गाड़ी को रिकवर कर अपने साथ ले जाते हैं। गाड़ी रिकवरी के बाद बैंक आपको और एक महीने का समय देता है, इस समय सीमा में आपको चार महीनों की ईएमआई, पैनल्टी और गाड़ी जहां पर पार्क की गई है उस वेयरहाउस का पार्किंग चार्ज चुकाना होता है।