सन ऑफ मल्लाह के मछली भात पर भारी पड़ा राम के निषाद का माखना का खीर

हरि साहनी। हरि सहनी भाजपा विधान परिषद का सदस्य और पिछड़ा/अति पिछड़ा कल्याण विभाग के मंत्री रह चुके है

सन ऑफ मल्लाह के मछली भात पर भारी पड़ा राम के निषाद का माखना का खीर
अपने साहस और कर्तव्यपरायणता के लिए प्रसिद्ध भगवान राम के बाल सखा निषाद राज जी का समुदाय हिंदू धर्म की एक धूरी है। इस समाज ने न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक संरचना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि चुनावी अभियान के दौरान कुछ दिनों तक सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह से ताना-बाना गुना गया कि मल्लाहों को हिंदू धर्म से अलग करने की कोशिश की गई। विपक्ष पार्टी के द्वारा वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी,जिन्हें लोकप्रिय तौर पर "सन ऑफ मल्लाह" कहा जाता है। उन्होंने मछली-भात वाले पहचान-प्रतीक को चुनाव अभियान का केंद्र बिंदु बनाया। वहीं भाजपा हरि साहनी के नेतृत्व में राम के निषाद के रूप में मखाने की खीर के जरिए जनता के पास पहुंचे। हरी सहनी निषाद समाज के दर्द और उनकी पहचान के साथ जोड़कर एक प्रतीकात्मक राजनीति की। हरि साहनी ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और आम जनता तक मल्लाह समुदाय की संघर्ष को महसूस कराने की कोशिश है। यह टकराव सिर्फ व्यंजन का नहीं, बल्कि सामाजिक समूहों पर प्रभाव जमाने की रणनीति का था। बिहार चुनाव का रिजल्ट इस बात का संदेश दे दिया हैं कि मछली-भात सिर्फ चुनावी जुमला है जबकि मखाना की खीर राजनीतिक संदेश का रास्ता। यह संदेश स्पष्ट है कि जातीय लड़ाई धार्मिक-सांस्कृतिक एकता में बदल देने की कोशिश है। जनमानस के लिए यह योजनाओं और विकास के नारों के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रतीकों की जीत है। हरी साहनी ने मखाना-खीर का ज़िक्र करके यह संदेश दिया हैं कि निषाद समाज अब सिर्फ़ आर्थिक वोटिंग नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान, और गौरव के आधार पर वोटिंग कर रहें हैं। बिहार का मतदाता सूझ-बूझ के साथ राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश दे दिया है कि बिहार का मल्लाह समाज जातीय जड़ों से उठी पहचान को धार्मिक और भावनात्मक जीत में बदल दिया है। बिहार चुनाव 2025 ने यह दिखाया है कि निषाद / मल्लाह पहचान सिर्फ वोट बैंक बनाने का ज़रिया नहीं है, बल्कि राजनीतिक पहचान और सामाजिक सम्मान की मांग बन चुकी है। यह संघर्ष बिहार की बड़ी तस्वीर का प्रतीक था। जहां यह तय हो गई कि राजनीति अब केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि भावनाओं, प्रतीकों और संस्कृति की परतों से तय होगी। बिहार चुनाव ने साबित कर दिया कि हिंदू धर्म खासकर भोई, कहार, केवट, मल्लाह सहित सम्पूर्ण निषाद समुदाय के आराध्य भगवान राम है।