Rail Line In Bihar: पटरियों पर विकास की रफ्तार, 11 साल में बिहार की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार
Rail Line In Bihar: पटरियों पर विकास की रफ्तार, 11 साल में बिहार की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार
Rail Line In Bihar: बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। बीते 11 वर्षों में राज्य के रेल नेटवर्क में कुल 303 किलोमीटर नई लाइनें जोड़ी गई हैं। हालांकि यह प्रगति महत्वपूर्ण है, लेकिन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के मुकाबले यह विस्तार अपेक्षाकृत कम माना जा रहा है।
पिछले 11 वर्षों में बिहार के रेल नेटवर्क में लगातार और स्थिर विस्तार देखने को मिला है। रेल मंत्रालय के मार्च 2024 तक के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2013 में राज्य में रेलवे लाइनों की कुल लंबाई 3,656 किलोमीटर थी, जो 2024 तक बढ़कर 3,959 किलोमीटर हो गई। इस तरह एक दशक से अधिक समय में बिहार के रेल नेटवर्क में कुल 303 किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों में दिखता है क्रमिक विस्तार
बिहार में रेल लाइनों का विकास भले ही किसी बड़े उछाल जैसा न लगे, लेकिन यह रफ्तार लगातार बनी रही। 2014 में राज्य का रेल रूट 3,639 किमी था। इसके बाद 2016 में यह 3,731 किमी और 2017 में 3,714 किमी रहा। 2019 तक नेटवर्क 3,720 किमी पहुंचा।
आगे चलकर 2020 में रेल लाइनों की लंबाई बढ़कर 3,794 किमी और 2021 में 3,803 किमी हो गई। 2022 में यह 3,825 किमी, 2023 में 3,888 किमी और 2024 में 3,959 किमी दर्ज की गई।
राष्ट्रीय परिदृश्य में बिहार की स्थिति
रेल विशेषज्ञों के अनुसार, 2024 में देश का कुल रेल नेटवर्क 69,181 किलोमीटर रहा। इसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 5.7 प्रतिशत के आसपास बैठती है। उत्तर प्रदेश (8,823 किमी) और महाराष्ट्र (5,930 किमी) जैसे बड़े राज्यों की तुलना में बिहार का रेल नेटवर्क आकार में छोटा जरूर है, लेकिन जनसंख्या घनत्व और यात्रियों की भारी संख्या के कारण यहां रेल लाइनों पर दबाव अपेक्षाकृत कहीं अधिक रहता हैरेल विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में बिहार में केवल नई रेल लाइनों के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा रूटों के दोहरीकरण, पूर्ण विद्युतीकरण और ट्रेनों की गति क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष फोकस जरूरी है. उत्तर–दक्षिण और पूर्व–पश्चिम रेल कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने से राज्य के भीतर यात्रा अधिक सुगम होगी, साथ ही पूर्वी भारत के प्रमुख व्यापारिक कॉरिडोर को भी मजबूती मिलेगी.
रोजगार और बाजार को मिलेगा बढ़ावा
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पीके अग्रवाल का कहना है कि राज्य में रेल नेटवर्क का विस्तार सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बिहार की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था से है. कृषि, श्रम और लघु उद्योगों पर निर्भर बिहार जैसे राज्य में रेल संपर्क ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होता है. नई रेल लाइनों, दोहरीकरण और अधोसंरचना विकास से माल परिवहन तेज हुआ है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और किसानों व छोटे उद्यमियों की बाजार तक पहुंच पहले से बेहतर हुई है.